यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की बेतुकी कहानी बयां करती है, जो एक विचित्र पारिवारिक त्रासदी के बीच, घर में अकेली रहने वाली अपनी माँ और अपनी युवा और सुंदर साली की "रक्षा" करने के प्रयास में धीरे-धीरे नैतिक सीमाओं को पार कर जाता है। अंततः वह बेकाबू हो जाता है और जटिल पारिवारिक रिश्तों और वर्जित इच्छाओं के जाल में फंसकर पतन की ओर अग्रसर हो जाता है।